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गुरुवार, 17 जून 2021

वृद्ध आश्रम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

 


वृद्ध व्यक्ति भरण - पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की प्राप्ति न होने पर विधि अनुसार अपनी सम्पत्ति वापस प्राप्त कर सकते हैं*


          मा० जनपद न्यायाधीश श्री मयंक कुमार जैन के निर्देशानुसार आज वृद्ध आश्रम , गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा के सचिव श्री कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा वर्चुवल मोड के माध्यम से किया गया । 

            विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को उत्तराधिकार एवं भरण पोषण के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तराधिकार एवं भरण पोषण अधिनियम , 1956 की धारा 20 , वृद्धजनों को अपने बच्चों से भरण - पोषण प्राप्त करने का प्रावधान करती है । धारा 23 में न्यायालय के द्वारा भरण - पोषण की धनराशि निर्धारित करने के सम्बन्ध में उपबन्ध दिये गये हैं । वर्तमान में न केवल पुत्र बल्कि पुत्रियों पर भी अपने माता - पिता के भरण - पोषण का दायित्व दिया गया है । उन्होंने बताया कि न केवल नैसर्गिक माता - पिता बल्कि दत्तक माता - पिता भी भरण - पोषण प्राप्त कर सकते हैं । आगे यह भी बताया गया कि जो वृद्ध अपने उत्तराधिकारी या रिश्तेदार को उपहार स्वरूप या फिर उनका हक मानते हुए अपनी सम्पत्ति उन्हें अन्तरित कर देते हैं तत्पश्चात उन्हें भरण - पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की प्राप्ति नहीं होती है , तो वह विधि अनुसार अपनी सम्पत्ति वापस प्राप्त कर सकते हैं और सम्पत्ति का अन्तरण रद्द करवा सकते हैं । 

        इसके अतिरिक्त सचिव द्वारा मा० उच्चतम न्यायालय एवं मा० उच्च न्यायालय के विधि - व्यवस्था , सरकारी नीतियों एवं निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की विस्तृत जानकारी दी गयी । सचिव द्वारा वृद्ध आश्रम , गोण्डा में प्रवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के आश्रय एवं भण्डार / पाक गृह के साफ - सफाई हेतु आवश्यक निर्देश देते हुए कोविड -19 प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करने हेतु बताया गया। 

          इस अवसर पर वृद्ध आश्रम के प्रबन्धक राजेश श्रीवास्तव , जगदीश भारती , गैवर दयाल दूबे , गणेशानन्द सरस्वती व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा व अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।

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